झूठ फ़रेब यहाँ सब स्वीकार, सच शिकार। इस दौर में किसपे एतमाद, धूर्त आबाद। धर्म की आड़ है कुकर्म दुराव, बेदर्द घाव। मुख मुखौटा पहचान मुश्किल, उर पंकिल। क…